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तकनीकी के इस युग में जहां सभी डिजिटल चीज़ों पर निर्भर हैं, भारत भी सम्पूर्ण रूप से डिजिटल होने की दिशा में अग्रसर हो रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर नयी योजनाएं लांच करके भारत को “डिजिटल इंडिया” बनाने के अपने स्वप्न को पूरा करने के करीब आते जा रहे हैं। परन्तु हर पहल एवं भारत की जनता को ज्यादा डिजिटल बनाने एवं हर ज़रुरत के लिए इन्टरनेट का प्रयोग करने के साथ ही हम भूल जाते हैं कि डिजिटल जगत के अपने फायदे हैं, तो अपने नुकसान भी हैं। 

सावधान! हम “डिजिटल” बनने की राह पर अवश्य हैं, परन्तु हमारे रास्ते में कई गंभीर खतरे भी हैं।

जी हाँ, इस साल की तीसरी तिमाही में भारत को वैश्विक रूप से वेब एप्लीकेशन आक्रमण के टारगेट देशों में सातवें स्थान पर रखा गया है, जो इस बात की और इंगित करता है कि हमें अपने देश में एप्लीकेशन तथा संरचना सुरक्षा को और भी मज़बूत बनाने की आवश्यकता है।

पर इस बुरी खबर में एक अच्छी बात यह है कि भारत दूसरी तिमाही में अपने पांचवें स्थान से सातवें स्थान पर आ गया है।

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत के पास 10,350 सिक्योर सर्वर हैं, जिनकी अगर कुल 462 मिलियन इन्टरनेट उपभोक्ताओं से तुलना की जाए तो यह इस बात का साफ़ संकेत है कि हमें डाटा के बढ़े हुए प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर संरचना की आवश्यकता है।

प्रिय ग्राहक, रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि 2017 की तीसरी तिमाही में वेब एप्लीकेशन आक्रमणों की संख्या पिछले साल इसी समय के मुकाबले 69 प्रतिशत अधिक बढ़ गयी है।

जहाँ हम इन्टरनेट जगत की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, वहीँ हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम साइबर आक्रमण एवं साइबर अपराध के साए में रह रहे हैं।